प्रदेश के 500+ हेल्थ सेंटरों में खून जांच ठप: कहीं मशीनें बंद, कहीं रीएजेंट खत्म; मरीज निजी लैब पर निर्भर

प्रदेश के 500+ हेल्थ सेंटरों में खून जांच ठप: कहीं मशीनें बंद, कहीं रीएजेंट खत्म; मरीज निजी लैब पर निर्भर

रायपुर। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के 800 से अधिक प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी खून जांच सेवाएं लगभग दो साल से ठप पड़ी हैं। इनमें से 500 से ज्यादा सेंटरों में या तो मशीनें बंद हैं या रीएजेंट के अभाव में जांच नहीं हो पा रही है। इसके चलते मरीजों को मजबूर होकर निजी लैब में महंगी जांच करानी पड़ रही है।

जानकारी के मुताबिक कई स्वास्थ्य केंद्रों में मोक्षित कंपनी की खून जांच मशीनें लॉक स्थिति में हैं, जबकि अन्य जगहों पर केमिकल और रीएजेंट की कमी के कारण लैब सेवाएं बंद हैं। केवल विकासखंड स्तर पर स्थापित हमर लैब में ही अधिकांश जांच उपलब्ध हैं, जहां मरीजों को रिफर किया जा रहा है। हालांकि दूरस्थ ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए वहां तक पहुंचना मुश्किल साबित हो रहा है।

पड़ताल में सामने आया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की लैब लगभग बंद जैसी स्थिति में हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी सीमित जांच ही हो रही है, जबकि हार्ट, किडनी, लीवर, थायराइड और मधुमेह से जुड़ी महत्वपूर्ण रक्त जांच पूरी तरह बंद हैं। इलेक्ट्रॉनिक एक्स-रे मशीनें भी लंबे समय से खराब पड़ी हैं। ये मशीनें तीन साल पहले सप्लाई की गई थीं, लेकिन कुछ ही महीनों में बंद हो गईं।

विशेषज्ञों के अनुसार सीबीसी, सीरम इलेक्ट्रोलाइट और HbA1c जैसी जांच शरीर की गंभीर बीमारियों का पता लगाने में बेहद जरूरी होती हैं। इनकी अनुपलब्धता से समय पर इलाज प्रभावित हो रहा है।

सरकारी अस्पतालों में मशीन और रीएजेंट की खरीद की जिम्मेदारी सीजीएमएससी को दी गई है, लेकिन अधिकारियों द्वारा समय पर खरीद नहीं हो पाने के कारण सेवाएं प्रभावित हैं। फिलहाल निजी संस्था के माध्यम से पैथालॉजी सेवाओं का सर्वे कराया जा रहा है और सरकार सुधार के प्रयासों में जुटी है।