बीएसपी प्रबंधन ने मैत्री बाग और स्कूलों को ठेके पर देने का निकाला टेंडर, विरोध शुरू

बीएसपी प्रबंधन ने मैत्री बाग और स्कूलों को ठेके पर देने का निकाला टेंडर, विरोध शुरू

भिलाई। प्रदेश के सबसे बड़े zoo भिलाई के मैत्रीबाग को अब सेल प्रबंधन निजी हाथों में देने की तैयारी कर रहा है। मैत्री बाग ही नहीं बीएसपी प्रबंधन द्वारा संचालित 3 स्कूलों को भी टेंडर पर देने का विज्ञापन जारी कर दिया गया है। इस प्रक्रिया का कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने विरोध किया है।

अलग अलग इश्तहार किया जारी

सेल प्रबंधन ने रूचि की अभिव्यक्ति के तहत अखबार में मैत्री बाग और 3 स्कूलों का इश्तिहार जारी किया है, ताकि कोई संगठन या संस्था इस गार्डन और जू को संचालित करना चाहती है तो उसे नियमों और शर्तों के तहत इसकी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

हॉस्पिटल के भी निजीकरण की तैयारी

बीएसपी प्रबंधन पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि वह एक जमाने में प्रदेश के सबसे बड़े सेक्टर 9 अस्पताल के भी निजीकरण की तैयारी में है। इस अस्पताल में बीएसपी कर्मियों के अलावा आम लोगों का भी इलाज किया जाता है

विरोध का दौर शुरू

मैत्रीबाग के निजीकरण की खबर सुनने के बाद इसका विरोध शुरू हो गया है। गार्डन के निजीकरण को लेकर भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि पब्लिक सेक्टर के निजीकरण में केंद्र सरकार सबसे आगे है। सेल प्रबंधन ने धीरे-धीरे कर पूरे प्लांट का निजीकरण कर दिया। अब शिक्षा स्वास्थ्य के साथ इकलौते गार्डन को भी नहीं छोड़ा।

यादव ने मीडिया से चर्चा में आरोप लगाया कि सेठ के पैसों से बनी सरकार अब सेठ का कर्जा उतार रही है। छत्तीसगढ़ महतारी भिलाई को तिल-तिल कर बेचने का काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के आम नागरिक, कांग्रेस पार्टी भाजपा के इस षड्यंत्र का पुरजोर विरोध करेंगे।

वहीं बीएसपी यूनियन सीटू के उपाध्यक्ष डीवीएस रेड्डी ने कहा कि निजी हाथों में गार्डन के जाने के बाद लोगों को आर्थिक दबाव भी झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसे बनाने की सोच बीएसपी के उन अधिकारियों की थी जिन्होंने प्लांट का निर्माण किया था। एक अच्छी सोच के साथ इस गार्डन को बनाया गया था और उसकी पहचान पूरे मध्य भारत में है। अगर इसे प्राइवेट हाथों में दिया गया तो यह अपनी पहचान खो देगा।

इधर आम अवाम का कहना है कि निजी हाथों में मैत्रीबाग का संचालन जाने के बाद प्राइवेट सेक्टर अपने हिसाब से सब काम करेंगे और जनता पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

5 दशक पहले की गई थी मैत्री बाग की स्थापना

भिलाई में 140 एकड़ में फैले मैत्री बाग की स्थापना 1972 में की गई थी। मैत्री बाग के अंदर मौजूद चिड़ियाघर ऐसा जू है, जिसे सफेद बाघों की नर्सरी भी कहा जाता है। अब तक इस जू से इंदौर, गुजरात, बंगाल सहित देश के अन्य राज्यों में सफेद शेर भेजे जा चुके हैं। इसके साथ ही देश-विदेश के पशु पक्षी यहां आकर्षण का केंद्र भी है। कर्मचारियों के मनोरंजन के उद्देश्य से बनाए गए मैत्रीबाग में शुरुआत में प्रवेश निशुल्क था। भीड़ नियंत्रण की आवश्यकता बढ़ने पर टिकट व्यवस्था शुरू हुई। समय के साथ टिकट शुल्क बढ़कर अब प्रति व्यक्ति 20 रुपए हो गया है।