पेगासस से लेकर आर्टिकल 370… देश के नए CJI सूर्यकांत के ये 5 बड़े फैसले…

पेगासस से लेकर आर्टिकल 370… देश के नए CJI सूर्यकांत के ये 5 बड़े फैसले…

जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें शपथ दिलाई। जस्टिस बीआर गवई की सेवानिवृत्ति के बाद यह नियुक्ति हुई। शपथ समारोह में सात देशों के मुख्य न्यायाधीशों सहित उच्च पदाधिकारी उपस्थित रहे। जस्टिस सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 तक लगभग 15 माह का कार्यकाल संभालेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत कई महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसलों से जुड़े रहे हैं। इनमें अनुच्छेद 370 का निरसन, पेगासस जासूसी मामला, बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची, राजद्रोह कानून तथा राज्यपाल-राष्ट्रपति की शक्तियां प्रमुख हैं।

हरियाणा के हिसार से की वकालत की शुरुआत

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उन्होंने हिसार में वकालत शुरू की तथा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस की। 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से विधि में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की, जिसमें प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल किया। 5 अक्टूबर 2018 से वे हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे। 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।

पांच बड़े फैसले

  • अनुच्छेद 370: 11 दिसंबर 2023 को पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने के केंद्र के कदम को वैध ठहराया। पीठ में जस्टिस सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • राजद्रोह कानून (धारा 124A): बेंच ने कानून को निलंबित रखते हुए निर्देश दिया कि पुनरीक्षण तक नई एफआईआर दर्ज न की जाएं। इसे अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया।
  • पेगासस स्पाइवादी मामला: जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राज्य को छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की।
  • बिहार मतदाता सूची: 65 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने पर याचिका पर पूर्ण विवरण साझा करने का निर्देश दिया। यह चुनावी पारदर्शिता को मजबूत करने वाला फैसला था।
  • राज्यपाल-राष्ट्रपति की शक्तियां: 20 नवंबर 2025 को अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति संदर्भ पर पांच सदस्यीय पीठ ने राय दी। जस्टिस सूर्यकांत की भूमिका उल्लेखनीय रही। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका समय-सीमा थोप नहीं सकती, लेकिन लंबी निष्क्रियता पर समीक्षा संभव है। यह तमिलनाडु राज्यपाल आरएन रवि के मामले से जुड़ा था।