एक देश एक चुनाव को पत्‍थलगांव में मिला भरपूूर समर्थन, सर्व समाज,संगठन और सर्व दलीय बैठक में आम सहमति से प्रस्‍ताव पारित, विधायक गोमती साय ने बताया देश की बड़ी जरूरत, कहा मिलेंगे दूरगामी परिणाम, समर्थन पर जताया सर्व समाज का आभार

एक देश एक चुनाव को पत्‍थलगांव में मिला भरपूूर समर्थन,  सर्व समाज,संगठन और सर्व दलीय बैठक में आम सहमति से प्रस्‍ताव पारित, विधायक गोमती साय ने  बताया देश की बड़ी जरूरत, कहा मिलेंगे दूरगामी परिणाम,  समर्थन पर जताया सर्व समाज का आभार

पत्थलगांव। वन नेशन, वन इलेक्शन को शहर में अभूतपूर्व समर्थन मिला। इसे लेकर सर्व समाज,सर्व संगठन द्वारा बुलाई गई सर्व दलीय बैठक में लोगों ने आम सहमति से इसे लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। लोगों ने इस संबंध में हस्ताक्षरित ज्ञापन राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मु को प्रेषित किए हैं। 


  गौरतलब है कि वन नेशन वन इलेक्शन का मुद्दा देश में एक अर्से से चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे लेकर सोमवार को हरियाणा पंचायती धर्मशाला में सर्व समाज, सर्व संगठन और सर्व दल की बैठक बुलाई गई थी। कार्यक्रम का संचालन अंकित बंसल ने किया वहीं पवन अग्रवाल ने बैठक के क्रियान्वयन में विशेष भूमिका निभाई। विधायक गोमती साय और की उपस्थिति में हुई इस बैठक में विभिन्न समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरूआत में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील गुप्ता ने विषय वस्तु के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए एक देश एक चुनाव के फायदे गिनाए। यहां लोगों को संबोधित करते हुए विधायक श्रीमती गोमती साय ने एक देश एक चुनाव को देश की एक बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि नवंबर में विधानसभा चुनाव के करीब छः माह बाद लोक सभा के चुनाव आ जाते हैं और उसके बाद नगरीय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की बारी आ जाती है। चुनावों के दौरान मतदाता सूची अद्यतन करने से चुनाव कराना एक लंबी प्रक्रिया होती है और एक विधानसभा का गठन होने के बाद का करीब डेढ़ वर्ष का कार्यकाल अलग-अलग चुनावों में बीत जाता है। वहीं अगला चुनाव होने से करीब 6 माह पूर्व से ही राजनीतिक दल चुनाव की कार्ययोजना में व्यस्त हो जाते हैं। बार - बार आचार संहिता की वजह से सरकार का काम - काज प्रभावित होता है वहीं प्रशासनिक अमले के चुनावी कार्यों में व्यस्त रहने से आम लोगों के कार्यों पर भी असर पड़ता है। एक देश एक चुनाव से इन सभी अनियमितताओं से लोगों को राहत मिलेगी वहीं सरकार के पास भी अपनी घोषणाओं को पूरा करने, जनहितकरी योजनाओं पर समुचित रूप से विचार कर उन्हें कार्यान्वित करने के लिए पर्याप्त समय होगा जिससे वास्तविक अर्थों में जनतंत्र का लाभ हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने से देश को बड़े आर्थिक बोझ से भी राहत मिलेगी और यह प्रस्ताव देश के लिए दूरगामी परिणाम लेकर आएगा। आरएसएस के जिला संघ चालक मुरारीलाल अग्रवाल ने सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई इस परिकल्पना को देश में अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव को लेकर लोगों की समझ बढ़ी है और बड़ी संख्या में लोग अलग - अलग दलों से जुड़ रहे हैं। देश में प्रत्येक समय चल रहे चुनावों से बड़ी मात्रा में राजनीतिक दलों के साथ ही प्रशासन और आम लोगों की युवा का भी अपव्यय होता है। एक देश एक चुनाव के विचार से शासन और प्रशासनिक मशीनरी अनावश्यक कार्य दबाव से मुक्त हो कर जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लग सकेगी। इससे लोगों के असमय रूक जाने वाले कार्य समय पर हो सकेंगे वहीं देश की उर्जा भी जनकल्याणकारी कार्यों की ओर प्रवृत्त हो सकेगी। सिक्ख समाज की ओर से एक देश एक चुनाव का समर्थन करते हुए रविंद्र सिंह भाटिया ने बताया कि देश के प्रथम तीन चुनाव एक साथ ही हुए थे परंतु बाद में उत्पन्न हुई परिस्थितियों में ऐसा संभव नहीं हो सका। कालांतर में इसका दुष्प्रभाव देश को समझ में आने लगा है। उन्होंने कहा कि पहले तीन चुनावों में होने वाला खर्च तीस पैसा प्रति मतदाता था जबकि 1962 का चुनाव आते आते यह बढ़कर 17 रू तक पहुंच गया। आज स्थिति यह है कि हजारों करोड़ रू आम चुनाव में खर्च होते हैं। वहीं इसके बाद भी बार - बार विधानसभा और अन्य चुनाव के लिए व्यय करना पड़ता है। उन्होंने एक देश एक चुनाव को देश के लिए परिवर्तनकारी बताते हुए इसके लिए देश में आम सहमति बनाए जाने पर जोर दिया। अग्रवाल समाज की ओर से अनिल मित्तल ने इसे देश के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का क्रांतिकारी विचार बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश ने प्रत्येक क्षेत्र में नए आयाम तए किए हैं और देश लगातार हर क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी उपस्थिति दर्शा रहा है। एक देश एक चुनाव भी इसी प्रकार का एक दूरदर्शी कदम है जो देश के राजनीतिक परिवेश में क्रांतिकारी सुधार लाएगा। ब्राम्‍हण समाज की ओर से गणेश शर्मा, गायत्री परिवार की ओर से डी एस चैहान, सरस्वती शिशु मंदिर की ओर से सुनील अग्रवाल, रौनियार समाज की ओर से जितेन्द्र गुप्ता, भोजपुरी समाज की ओर से अभय सिंह, चेंबर आॅफ काॅमर्स की ओर से नवीन गर्ग, अभाविप की ओर से गुलशन पांडे, गोंड़ समाज की ओर से हंसलाल सिदार, उरांव समाज की ओर से उमाशंकर भगत के साथ ही उपस्थित अलग - अलग समाज के लोगों ने इसे देश की वर्तमान आवश्यकता बताते हुए अपना समर्थन व्यक्त किया।